शादी - शूदा लोगो में अक्सर प्यार की कमी क्यों रहती है....?
शादी से पहले वर और वधू के हर पहलू का वाकायदा निरकक्षण किया जाता है कि वे करते क्या है , उनकी शिक्षा क्या है , उनकी आमदनी क्या है, उनका खानदान क्या है.... वैगरह - वैगरह... उसके बाद कुंडली मिलायी जाती है। सब क़ुछ समाज और परिवार के अनुसार मैच होने के बाद दो लोग शादी के प्रणव सूत्र में बंधते नहीं, परन्तु, अक्सर समाज और परिवार के रीति-रिवाज़ के बंधन में बांध दिये जाते है। लेकिन प्यार में ऐसा नहीं होता - प्यार महज हो जाता है। प्यार जातीय पसंद होता है। शादी एक मुक्कमल चीज़ होती है और प्यार अधूरा होता है। मुक्कमल और अधूरा एक दूसरे का विरोधाभास होता है। एक -दूसरे के साथ नहीं रह सकते। पूर्णता आते ही अधूरापन समाप्त हो जाता है। शादी के बाद पति और पत्नी एक दूसरे में परफेक्शन ढूढ़ने में लग जाते है । एक- दूसरे को सुधारने में लग जाते है। एक-दूसरे के कमियों को उजागर करने में लग जाते है। शादी हो गयी है मतलब की एक दूसरे में कोई कमिया नहीं होनी चाहिए। यही सुधरने और सुधारने में पूरी जिंदगी समाप्त हो जाती है। प्यार पफेक्शन का ...